#Kavita by Om Prakash Agrwal , Babua

वंदन

 

पुण्य पटल के गौरव का, स्वर्णिम इतिहास तुम्ही तो हो

सत्य सनातन सुरभित गुलशन, ऐसा विश्वास तुम्ही तो हो

कंचन जैसे शब्द आपके, जैसे उपवन मे पुष्प खिले हों

भावों की सुरसरिता मे मानो, नेहसुधा के अश्क मिले हों

सदा आपके वचनों मे जो, मधुरिम प्यार उमड़ आता है

और आपके नेह नयन मे, जब जब नीर छलक जाता है

तब तब हमने अपने तन मे, नई ऊर्जा पाई है

और हमारे गीतों मे भी, प्रियवर की परछाई है

अपनो से अपनेपन का, सचमुच अहसास तुम्ही तो हो

पुण्य पटल के गौरव का, स्वर्णिम इतिहास तुम्ही तो हो

 

🌹ओम अग्रवालः बबुआ

मुंबई/बैंगलोर

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