#Kavita by Om Prakash Agrwal , Babua

भीगी भीगी पलकों मे

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मनमंदिर मे भाव बसंती अन्तर्मन मे सावन हो

और चपल चितवन मे कोई मूरत परम सुहावन हो

दातों मे अधरन को भींचे गोरिया सोलह साल की

पाजेब सुनाए गीत नेह के मृगनयनी के चाल की

चित चिंतन मे कोई चितेरा चंचल चैन चुराता है

भीगी भीगी पलकों मे तब नेह बसंती आता है

ओम अग्रवालः बबुआ

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