#Kavita by P K Hathrasi

अम्रपाली★★★★

सौन्दर्य की वो धनवान

छोड़ सब कुछ आयी थी

वैशाली की नगर वधु वो

प्रवज्या लेने आयी थी

 

भिक्षुओं में हुए मतभेद

जता रहे थे इस पर खेद

 

ऐश्वर्य जिसका पिता हो

विलासिता जिसकी जननी

प्रवज्या से उसका कैसा नाता

स्वच्छंदता उन्मुक्ता जिसके संबंधी

 

तथागत ने इसका किया समाधान

पुनः दोहराया धम्म का ज्ञान

फिर हुए भिक्षुओं के मत समान

और मिला उसे बिहार में स्थान

 

झूठ कपट को ठुकरा कर

सत्य मार्ग धम्म का अपनाया

बनी प्रथम महिला भिक्षुणी

फिर अम्रपाली ने भी दोहराया

बुद्धम् शरणम् गच्छामि

धम्मम् शरणम् गच्छामि

संघम् शरणम् गच्छामि…..

 

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इं.पी.के. हाथरसी

 

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