#Kavita by Parmanand Raman

चिड़िया वाला पेड़
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एक पेड़ था चिड़ियों वाला
घर के ठीक सामने

पेड़ पहले से था या घर
याद नहीं
मैने दोनो को साथ हीं देखा
जब भी देखा

यह कहना भी गलत नही होगा
घर था पेड़ के ठीक सामने

जब भी घर को याद करता हूँ
पेड़ की आकृति पहले बनती है

और जब पेड़ को याद करता हूँ
कई किस्से उभरते हैं

दिनभर चिड़ियों का शोर और उत्पात
बहुत कोशिश होती थी
चिड़ियों को दूर खदेडऩे की

संभवतः चिड़ियों को पेड़ से दूर रखा जा सकता है
मगर पेड़ को चिड़ियों से दूर रखना असंभव था

सबसे ज्यादा जो किस्सा याद रहा
उस पेड़ से जुड़ा
वो उसी पेड़ के काटे जाने का था

मै भी शामिल था उसी के नीचे
उस गंभीर चर्चा में
उसे हटाने के बारे में

मै आज भी विस्मित होता हूँ
उसके पास पर्याप्त समय था
चुपचाप वहां से दूर चले जाने का

वह स्वभाववश खड़ा रहा
जैसे खड़ा रहा फेंके गये ढेलों के सामने
अति सहजता से

और उतनी ही शिष्टता से कटता रहा
शाख-शाख, पात-पात

पहले पेड़ कटा या पहले चिड़िया उड़ीं
याद नहीं

उसे काटा गया घर के विस्तार के लिए
विस्तार जीवन का मृत्यु के आह्वान से हुआ

पेड़ काटा गया, घर विस्तृत हुआ

पेड़ कटने के बाद पेड़ जितनी जगह
मन में बनी रही
जहाँ फिर कुछ और ना उग सका ना बन सका

हाँ एक शोर चिड़ियों का
सुनाई दे जाता है जब-तब
उसी पेड़ जितनी जगह में

-परमानन्द रमन

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