#Kavita by Pintu Kumar Dadhich

आज सुबह सुबह एक ख्वाब देखा
ख्वाब में उसका मुस्कुराता चेहरा देखा।

वही उसकी पुरानी तस्वीर थी,
वही उसका संगमरमर सा रूप था
कुछ नहीं बदला था उसका
सिर्फ नाम हमारा बदला था।।

सातों वचन निभाने का वादा किया था
वादों को निभा न सके, दिल दोनों का रो रहा था।
दिल उस दिन भी रोया था, आज भी वैसे ही रो रहा था।।

मेंहन्दी से रचे उसके हाथों को देखा
मेंहदी में छिपे उसके प्यार को देखा
आखिर दिल में जो उसने बसाया था
प्यार से मेरा नाम मेंहन्दी में दिखाया था।

आंसुओं से छलकती उसकी आंखों को देखा।
आज झील सी गहरी उसकी आंखों में पानी देखा था।
नदियों सी कलकलाहट ओर समंदर सा ठहराव देखा था।।

लाल जोड़े में उसको मुस्कुराते देखा
चांदनी रात ने भी उसको निहारा था।

दुनियां की रस्मों ने रोका था।
टूटा था दिल दोनों का मगर,
महफ़िल में हंसना भी जरूरी था।

ख्वाबो में टूटा दिल रो रहा था
प्यार भरे इशारों से उसे चुप करवाया था।

ख्वाबों में मोहब्बत ओर मोहब्बत में प्यार था।
टूटे दिलों में दो जान एक दिल था।।

रोते हुए सहेलियों ने उसे विदा किया,
आखिर पिया संग जो उसे जाना था।

आज सुबह सुबह एक ख्वाब देखा,
ख्वाब में सच्चाई ने पर्दा उठाया था।
मिलन हमारा नहीं होना था।
जुदा जो एक-दूसरे से होना था।
आखिर ख्वाबों ने फिर एक बार मुझे रुलाया था।
आज सुबह सुबह एक ख्वाब…
Pintu kumar Dadhich
Churu 331001
Mo. 7073797882

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