#Kavita by Pintu Kumar Dadhich

हाँ मां वो एहसास ही तो है।
तेरे कदमों में ही तो मेरा संसार है।
चाहूं तो भी दूर नहीं जा सकता
सोचूं तो भी डर लगता है।
आखिर वो एहसास ही तो है।

ख्वाबो में भी तो तेरा ही साया है
जब भी मुश्किल आई तुम्हीं को
अपने पास पाया है।
ऐसा है तेरा प्यार, ऐसी है तेरी दया।
जिसे कोई ना समझ पाया।

हाँ वो तेरा उंगली पकड़ना
वो डांट कर पुचकारना
वो खेलने से रोकना
ओर
फिर पुछना :- कब तक आ जाएगा।।

यही तो तेरा एहसास है
यही तो तेरी ममता है।
ओर इसी की छाया है।।

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