#Kavita by Prakash Chandra Baranwal

वेलेंटाइन – डे कल्चर की रंगरेली में, रंगे युवा हैं सारे

राष्ट्र भक्तों की अमरकीर्ति, भूल गये क्यों युवा हमारे

 

लाहौर में आज इसी दिन,  फाँसी की सज़ा सुनाई जिनको

भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु सम, राष्ट्र चेतना के गौरव को

 

भटक गई है युवा – शक्ति, क्यों स्वछंद – आचरण दिखता ऐसा

मानो शर्म – हया सब भूल गये हैं,  अभद्र आचरण उनका ऐसा

 

आज शपथ लेने का दिन है,  वीरों को स्मरण करने का दिन है

जिनके कारण मिली आजादी, उन वीरों के सम्मान का क्षण है

 

बहक गये सब युवा हमारे, मतिछिन्न हुए दिखते हैं सारे

भू – लुंठित हुई संस्कृति अपनी, पश्चिमी सभ्यता के मारे

 

आजादी के उन दीवानों को, आज स्मरण करने का दिन है

वेलेंटाइन – डे के अवसर पर, श्रद्धाँजलि अर्पण का क्षण है

 

जिनने आजादी की खातिर, निज प्राणों की कुर्बानी दी है

क्या सुख भोगा उन लोगों ने, यह तो उनकी अमरकीर्ति है

 

बंटवारा हेतु जिम्मेदार है गाँधी – नेहरू, दोषी हैं ये भ्रम जाल का

देश बंटा इन्हीं लोगों के कारण, और हम करते नित पूजा इनका

 

लाखों लोगों की तपश्चर्या से आज देश आजाद हुआ है

कुछ चरित्रहीन दुर्बलता ने, धर्म विखंडित देश किया है

 

सारी मर्यादाओं को भूलकर,  दल सारे राजनीति  करते

धर्म, जाति, मजहब के नाम, मत पाने हित मरते दिखते

 

आज राष्ट्र के मूलाधार के, यशोगान का पावन दिन है

चरित्रहीनता से बचें युवा, अंतस उर मंथन का क्षण है

 

आज राष्ट्र – शहीदों के, वीरों के,  चरण – वंदना का क्षण है

सत्तर वर्षों में जिन्हें भुला दिया, उन सबको सश्रद्ध नमन है

 

प्रकाश चन्द्र बरनवाल, आसनसोल

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