#Kavita by Prakash Chandra Barnwal

लो आ गई दीपावली, तुम दीप  खुशियों के जलाना

एक दीप उस द्वार पे रखना, जिनने खोया है अपना

 

जिसने, पूरे वर्ष मनाया मातम, फूट – फूट कर रोया है

आज उन्हें भी लगे  शहर में, कोई तो है, जो अपना है

 

एक दीप उस द्वार पे रखना, जहाँ तमस, निरक्षरता का अँधियारा

प्रशस्त करें पथ ज्ञान – ज्योति से, शिक्षा से हो घर – घर उजियारा

 

सौहार्द, चेतना को जागृत कर, नव – ज्योत हृदय में भर कर

प्रज्ज्वलित करें प्रेम का दीपक, इन उत्सवों – को हर्ष से भर

 

दीप – ज्योति से तम हो विगलित, मिटे हृदय का अँधियारा

पस्त होवें आसुरी शक्तियाँ,  सुख – समृद्धि दिखे जग सारा

 

प्रिय ! कांतिमय हो जाये तन – मन, और शोषण मुक्त  हों जन

दिखे नेह सिंचित वर्तिका से, ज्योति भाषित, विभा – निकेतन

 

हम सब मिल संग साथ – साथ, झूमें – नाचें और मुस्काएं

भूल भेद औ’ राग – द्वेष, आओ मिल ज्योति – पर्व मनाएं

 

प्रकाश चन्द्र बरनवाल, आसनसोल

सम्पर्क – 9818809768

 

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