#Kavita by Prashant Dixit

मातृ दिवस पर एक छोटा सा प्रयास आप सभी के बीच

 

तेरी याद हर पल रुलाती है माँ।

मुझे तूँ बहुत याद आती है माँ।

 

बहुत बेचैन रहता हूं मैं,

हमसे क्यों दूर जाती है माँ।

 

सुबह होते ही चाय की प्याली,

तेरी आँखों मे दर्शाती माँ।

 

तेरी दुआ रहे हमपर हरदम,

बस यही रब से मांगा है माँ।

 

बड़े बंधन में बधा हूँ

मैं,

दो पैसो के लिए भुलाती है माँ।

 

बीते दिन कुछ वैसे याद आये।

प्रशान्त को तेरी याद सताती है माँ ।

 

दिन रात एक कर देती है माँ,

मेरे दर्द में अपने आँसू बहाती है माँ।

 

प्रशान्त कुमार दीक्षित सागर

बारा दीक्षित

मो.8874337274

 

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