#Kavita by Prashant Singh Shishu

गीत   (तुमको चाहूँ जरूरत से ज्यादा)

 

मन से मन ना मिले दिल मिला लो

खूबियाँ ख़ामियाँ सब सम्हालो

कहीं दिखते नही हो शिशू तुम

खिड़कियों पर जरा झिलमिला लो।।

 

रूप को अंखियों मे नहाये

उम्र की उम्र सी हो गयी है

नींद पलकों के साये मे जगकर

रंग बेरंग सी हो गयी है।

 

वो देखो तुम्हारी छतों पर

चांद सजकर के उतरा हुआ है

तुम न निकलो कहीं अपनी छत पर

मेरी आहट पे पहरा हुआ है।।

 

बिजलियों की तरह यूं हंसो तो

इन्द्रधनुषी रंगो मे रंगों तो

दीप सा मै भी जलता मिलूंगा

दीपिका सी तुम भी सजो तो।।

 

किसी मंदिर की मूरत से ज्यादा

तुम को चाहूँ जरूरत से ज्यादा

सोते जगते और आते जाते

तुमको देखूं मुहूरत से ज्यादा ।।

 

जख्म नजरों  से गहरा दिया है

ख्वाब लेकिन सुनहरा दिया है

तुम तो दरिया किनारे खड़े हो

मुझको सहरा मे ठहरा दिया है।।

 

-प्रशान्त सिंह “शिशू”

उन्नाव(उ0 प्र0)

7053582550

 

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