#Kavita by Prashant Singh Shishu

इतना टूट के बिखरा कौन है

मेरी तरह यूं  टूटा कौन है ।।

 

चांद सभी को चाहिए मगर

चांद का जोड़ा कौन है।।

 

अब तो शायर बना के छोंडेगा

मेरी गजलों मे ये महका कौन है।।

 

यूं तो मेरी गली महकती है

मालूम है? यहाँ रहता कौन है।।

 

तुम रातों को जाग रहे हो

इधर भी सोता कौन है।।

 

एक ये भी रिश्ता समझ नही आया

हम सबके हैं मगर हमारा कौन है।।

 

बदलने की बातें करना गैरजरूरी है

अब यहाँ पहले जैसा कौन है।।

 

कम्बख्त़ बेचैन किये देता है

आंखो के जीने दिल मे उतरा कौन है।।

 

गम जताने के अपने तरीके हैं

वरना मेरी तरह हंसता कौन है।।

 

प्रशान्त सिंह  “शिशू ”

उन्नाव (उ0 प्र0)

7053582550

 

 

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