#Kavita by Praveen Baranwal

आज मुलाकात हुई,

जाती हुई उम्र से !

 

मैने कहा,..

“जरा ठहरो !”

 

तो वह हंसकर,

इठलाते हुए बोली,..

 

“मैं उम्र हूँ, ठहरती नहीं !

पाना चाहते हो मुझको,

तो मेरे हर कदम के संग चलो !!”

 

मैंने मुस्कराते हुए कहा,..

 

“कैसे चलूं मैं

बनकर तेरा हमकदम !

संग तेरे चलने पर छोड़ना होगा,

मुझको मेरा बचपन,

मेरी नादानी,

मेरा लड़कपन !

 

तू ही बता दे कैसे

समझदारी की

दुनियां अपना लूँ !

 

जहाँ हैं नफरतें, दूरियां,

शिकायतें और अकेलापन !!”

 

उम्र ने कहा,..

 

“मैं तो दुनियां ए चमन में,

बस एक ‘मुसाफिर’ हूँ !

 

गुजरते वक्त के साथ

इक दिन,

यूं ही गुजर जाऊँगी !

 

करके कुछ

आँखों को नम,

कुछ दिलों में

यादें बन बस जाऊँगी !!”

 

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