#Kavita by Prem Prakash

‘प्रेम का हाल’

 

सुना है वों हमपे मेहरबान है मुद्दत से ।

फिर से मेरा परीक्षा है मुद्दत से ।।

वों चुपी से कहना चाहती हैं ।

उनकी जुबान चुप है दिल मचलता है ।।

वें कभी खुल के नहीं मिलते कभी।

शायद ! हमसे दरमियान हैं! ।।

मेरा मन कब सुकून पाएगा ।

दर्द को इत्मीनान है मुद्दत से ।।

उनके जज्बों की मूल्यों तय हैं ।

उनका दिल भी दुकान है मुद्दत

से ।।

उसके हथेली में रच गईं मेंहंदी ।

वें खुश है हमसे अलग हो के।।

साधारण सी बात है, और गहरी भी।

‘प्रेम’ का हर लम्हा है मुद्दत से।।

 

प्रेम प्रकाश

शोधार्थी

वर्धा महाराष्ट्र

भारत

मोबाइल 9518969540

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