#Kavita by Prem Prakash

: समाज

आज कैसा वक्त है

चारों तरफ लूट मचा है

अफरा तफरी मचा हुआ है

सब एक से बढ़ के एक

चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा

सुबह से शाम तक लूट ही लूट

हर एक दूसरे के खून हाथ रंगे

कैसा समाज में फस गया हूँ मैं

आज धरती पुकार रही है

ओ वक्त आ गया है

फिर से गुलामी की जंजीरों में

घिर चुका है देश

भ्रष्टाचारों, लुटेरों,

अफसरों,

सरकार के ठेकेदारों

का हो के रह गया देश

कहाँ गए ओ जमना

जब भाई भाई साथ रहा करते थे

कहाँ गया ओ समाज

कहा गया ओ शहर

ओ कस्बे,

ओ गांवों की सोनधी महक

जो गलियारों से निकला करता था

कहाँ गया ओ नानी की किस्से

कहा गया ओ होली,

दशहरा के पर्व त्योहारों

के खुशियां कहा गया

कहाँ गया ओ समाज

कहा गया ओ समाज

 

प्रेम प्रकाश

Leave a Reply

Your email address will not be published.