#Kavita by Pt. Chandan Tiwari

एक सरकारी नौकरी की तमन्ना लिये

व्यक्ति क्या-क्या करता हैं।………..

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कब मिलेगी तू ऐ-नौकरी वो खुशियों की

हम सभी बाँहें फैलाकर बैठे हैं तमन्नाओ की

 

नींद ना आती अब रातों में चैन तू ले उड़ी

कब-तक रातों को पन्ने पलटते तू ले उड़ी

 

पेट ना देखूँ पहले खोलू बो किताब के पन्ने

जो मिला वो बनाया वहीं खा फिर पलटे पन्ने

 

हर युवा अपनी उम्र से खेल जाता ऐ-नौकरी

कब तू उनको मिलेगी और खुशी देगी ऐ-नौकरी

 

जब वो युवा अंजान शहर में पढ़ने जाता हैं

पहले भटकता फिरता हैं वो फिर पढ़ पता हैं

 

बड़े शहर में वो एक सस्ता कमरा खोजता हैं

कम रुपयों में वो रहकर मेहनत से वो पढ़ता हैं

 

तेरे पीछे ऐ-नौकरी वो अपना घर-गाँव

रिस्ते यार छोड़ता हैं

अंजान शहर में ना मिलते नाते-रिस्ते

फिर भी घर छोड़ता हैं

 

सब्जी और राशन के थैले लिए वो

वहाँ घूमते फिरते हैं

कुछ अपनी तकदीर पर और कुछ

किस्मत लिए फिरते हैं

 

सीने में लिए नौकरी का एक सपना जिंदगी

का सफर करते हैं

छुपाए मन में वो प्यार को खचाखच बस-ट्रेनों

में सफर करते हैं

 

सभी अखबारों पत्र-पत्रिकाओं में वो

तुझे खोजते फिरते हैं

प्रेम को छोड़कर वो जिंदगी की नई

उमीद खोजते फिरते हैं

 

कब मिलेगी तू ऐ-नौकरी वो खुशियों की

हम सभी बाँहें फैलाकर बैठे हैं तमन्नाओ की…

 

#रचयिता-चन्दन तिवारी………

 

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