#Kavita by R C Verma

कविता-नारी का सम्मान

 

नारी ही वो कल्प तरू है

जो वंश बेलि फल देती है,

औरों के सम्मान की खातिर

अपमान स्वयं सह लेती है।

धरती जैसी है सहनशीलता

जो बोझ कुटुम्ब का सहती है,

सब के दुख में साथ निभाये

पर ना अपने दर्द को कहती है।

भूख प्यास और कष्ट अनेकों

वो निशदिन झेला करती है,

अपना दिल में दर्द छुपाकर

खुद हँस कर खेला करती है।

शायद ऐसी ममता मूर्ति का

अब याद हमें अहसान नहीं,

जिसके गर्भ से जन्म लिया

अब उसका ही सम्मान नहीं।

जो पीड़ा में सिर सहलाती थी

वो सिर आज पटकती रहती है

गोदी में दूध पिलाने वाली मां

दर-दर आज भटकती रहती है।

 

कवि- आर सी वर्मा

मेघपुरा

जिला-भिंड (म.प्र.)

मो.नं-8085564512

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