#Kavita by Raj Malpani

जाने कितने आये

और यूँ ही चले गये

पानी पे अपनी

कहानी लिखने वाले,

नादानी पे

कितनी नादानी

हरदम करने वाले.

बहता पानी बस

बहता रहता है,

वो अपने जैसा रहता है.

तरल, सरल और विरल

वो वैसा ही रहता है,

बस कभी बादलों से

और कभी

आँखों से झरता है,

जाने कितने ढंग से

वो बस यूँ ही

बहता रहता है.

उसपे लिखी हर कहानी

मिट जाती है

लेकिन फिर भी जो

सुन सकते हैं

और साथ साथ उसके

बह सकते हैं उनसे

वो अपनी कहानी कहता है,

धीरे धीरे वो लहर लहर

और बूँद बूँद खुलता है…

 

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