#Kavita by Raj Malpani

प्रेम में होना
और आनंद की वर्षा में
भीगना-भिगोना
कितना सरल है,
पर सरल होना
कितना कठिन है…
प्रेम नहीं है शब्दों में,
लेकिन शब्दों का
वही जीवन है,
वही धरा है
वही गगन है…
दिन में छिपी है रात
और रात के ह्रदय में
छिपा हुआ दिन है,
विनाश की कोख में
पलता सृजन है.
औरों को समझाना
सरल बहुत है,
पर खुद को समझाना
बहुत कठिन है…

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