#Kavita by Raj Malpani

अस्तित्व में
कोई यह तय
नहीं कर सकता कि
क्या मूल्यवान है
और क्या मूल्यहीन है.
यहाँ जो भी है
वो अपनी जगह परिपूर्ण है
और अस्तित्व के रहस्य को
अपने भीतर संभाले हुए है.
जब एक खोजी हर बात का
ख़ुद ही मूल्य तय करने
लग जाये तो फिर
समाधान मिलना बहुत
मुश्किल हो जाता है.
एक गुरु के साथ होने के
अपने ही कायदे होते हैं.
वहाँ हम मूल्य तय नहीं कर सकते.
कौन जाने अगले पल क्या होगा.
एक गुरु के साथ चलना
अनिश्चितता की प्रज्ञा
के साथ चलना है.
गुरुकृपा हो या
अस्तित्वकृपा उसके लिये
धैर्य और इंतज़ार जरूरी है…
और एक बात
हमेशा स्मरण रखनी चाहिये
कि गुरु का और अस्तित्व का
सारा काम रहस्यमय है,
अगले क्षण क्या होगा
ये कोई नहीं जानता…
इसलिये बस उसी पल में
समग्रता से जीना होता है
जो पल सामने होता है…

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