#Kavita by Raj Malpani

आओ,
उन लम्हों को
फिर से जी लें,
जिन लम्हों में
सदियाँ रहती हैं,
जिनके भीतर
एहसासों की
नदियाँ बहती हैं…
अपने भीतर से
फिर से
उस धूप को
बाहर ले आयें,
जिसकी किरणें छूकर
जीवन की
कलियाँ खिलती हैं…
प्रेम की
उस गली को
फिर से
रोशन कर लें,
जिसमें आकर
जग की सारी
गलियां मिलती हैं…
आओ
कुछ कह लें,
कुछ सुन लें,
जिस कहने-सुनने से
अपनी-अपनी
कमियां मिटती हैं…

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