# Gazal by Raj Malpani

शहीदों की चिताओं पर, लगे हर बरस मेले

अत्याचारियों ने मिलकरके मासूमों से खेले

 

सन उन्निस सौ उन्निस दिन था तेरह एप्रिल

मची धारा पर हाहाकर लगा मौत का खेल

 

होली का कोई पर्व नहीं, ना था माह फाग

लाल रंग से रंगे धारा, ‘जलियाँवाला बाग़

 

दुष्ट अँग्रेजो की गोलियोंकी हुई थी बौछार

दानवों के हाथ से हुई मानवता भी शर्मसार

 

आँखो से देख मृत्यु, बुज़ुर्ग भी छड़ें दीवार

हिम्मत से हर एक लड़ें, फिर भी पाए हार

 

शांति सभा के लिए जुटी देश की आबादी

नरसंहार कर के किए, मनुकुल की बर्बादी

 

सभा की दीवारों में फँसे न कोई दूजा द्वार

हैवनो को देख कर,. दौड़ पड़े नर और नार

 

आज़ादी के हित में,. जुट गए थे मैदान में

पलभर में तब्दील हुई,. धरती शमशान में

 

अमर हुआ हर भारतीय हुआ था जब वार

दुख में था हर घर,. नहीं भुला इसे संसार

 

_____”श्र्द्धांजलि”___

🏻..राज मालपाणी,.’राज

        (शोरापुर-कर्नाटक)

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.