#Kavita by Raj Malpani

 

इन पथरीली
और सपनीली
हकीकतों के बीच
मैं भी एक ख़याल हूँ,
तू भी एक ख़याल है.
जवाबों के शहर में
मैं भी एक सवाल हूँ,
तू भी एक सवाल है.
ज़िंदगी के शतरंज पे
न जाने किसने ये
मोहरे सजाये हैं
खेल के नियम भी
उसने ही बनाये हैं
इस खेल में बस
मैं भी एक चाल हूँ,
तू भी एक चाल है.
हार और जीत का,
बैर और प्रीत का,
सब गुबार हटते ही
पता चलता है कि
मैं भी एक कमाल हूँ,
तू भी एक कमाल है…

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