#Kavita by Raj Shukla Namr

औरों के दिल में अपनी जगह उच्चतम बना

नेकी में अपने आपको सबसे प्रथम बना

 

तुझको भी हाँ मिलेगा मुहब्बत का कारवाँ

विश्वास के काबिल तो स्वयं को सनम बना

 

छल छंद राग द्वेष से हट के परे जरा

दुखियों की खुशी खुद को निर्बलों की दम बना

 

ता उम्र सुकूँ पाने के लिए तू मेरी सुन

शैतां से दूरी ज्यादा और ईश्वर से कम बना

 

मजलूम के अश्कों को पौंछ हाँथ से अपने

मुफलिस के दर्दे गम को अपना दर्दे गम बना

 

अल्लाह ने बख्शी है तुझे तेरी जिंदगी

सत्यम शिवम औ राज इसे सुंदरम बना

 

राज शुक्ल “नम्र”

 

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