#Kavita by Raj Shukla Nmr

 

कल कल करती

अपने ह्रदय मे

समेटे हुये

अथाह जीवन

जमीन को

देती हुई

हरियाली

अपने

निश्चित मार्ग पर

चलती हुई

जा रही है

मिलने

अपने प्रियतम

सागर से

कुछ

इठलाती हुई

थोड़ा

बलखाती हुई

आँखो मे लिये

सुनहरे सपने

जी हाँ

ये

एक

नदी है

राज शुक्ल ‘नम्र’

 

 

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