#Kavita by Rajendra Bahuguna

मैं मीडिया हूँ,बिक चुका हूँ
मैं मीडिया हूँ मैं सियासत में कभी का बिक चुका हूँ
मैं नग्न हूँ,देश की जनता को कबका दिख चुका हूँ
मैं शपत-पत्रों में अपनी आत्म-हत्या लिख चुका हूँ
कब्र में दबकर भी जीना, सल्तनत से सिख चुका हूँ

इमान से जीने और मरने की कला भी जानता हूँ
मैं सियासी तूफान का हर जलजला पहचानता हूँ
पूरी सियासत भ्रष्ट है,मुझको बताओ मैं क्या करूं
इस चार दिन की जिन्दगी में बे-मौत मैं कैसे मरूं

मैं चारण बना,चमचा बना,चैनल चलाने के लिये
मैं भाण्ड हूँ बस ,छल,कपट के गीत गाने के लिये
मैं तो बस, सत्ता सियासत के स्वरों को गाउँगा
छल,कपट से मैं सियासत को सफल दिखलाउँगा

मेैं तो भरत हूँ राम का बस ,चप्पल उठाने के लिये
ये बनवास भी होते रहेगें सत्ता को पाने के लिये
सल्तनत में सुर-असुर का युद्ध भी चलता रहेगा
अब आवाम का ये मिडिया संग्राम से पलता रहेगा

यंहा कोई भी पी.एम.बने,उसको खुशामद चाहिये
मीडिया मजबूर है अब उसको भी आमद चाहिये
इन पत्रकारो को सियासत में सुलभ पद चाहिये
अब चैनलाे को भी सतत सम्मान का कद चाहिये

सत्य लिखने की कला का जलजला भी खो चुका हूँ
आज तो मैं मीडिया भी सल्तनत का हो चुका हूँ
तकनीक में भी मैं सियासी बीज अपने बो चुका हूँ
इस सत्य को, इमान को तो मैं कभी का धो चुका है

बे- रोजगारी, मुखमरी, मंहगायी गायब हो चुकी है
हर समस्या चैनलो में अब अजायब हो चुकी है
चारो प्रहर अब बे-तुकी चर्चा को चैनल गा रहा है
क्यों सर्कसी जोकर सियासत के हमें दिखला रहा है

मैं मीडिया हूँ,मैं सियासी सल्तनत को जानता हूँ
मैं हर सियासी हैसियत का वाकिया पहचानता हूँ
मैं सियासत के सफर को छांट करके छानता हूँ
मजबूर हूँ, मुर्दा बना हूँ, फिर भी सीना तानता हूँ

मां भारती के दर्द को क्या मीडिया दिखलायेगा
क्या निष्पक्षता की मिडिया हर खबर ला पायेगा
कब तक सियासी नग्नता के गीत चैनल गायेगा
क्या मीडिया इस आग को पढ कर कभी शर्मायेगा।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815

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