#Kavita by Rajendra Bahuguna

अटल जी को अर्पित श्रद्धा सुमन
अगर देश का जन-नायक हो ,अटल बिहारी जैसा हो
अगर देश का अधिनायक हो, अटल बिहारी जैसा हो
अगर देश का अभिभावक हो ,अटन बिहारी जैसा हो
सत्ता में सिह सा शावक हो तोअटल बिहारी जैसा हो

अटल बिहारी अटल रहे, अटल ही बनकर चले गये
अटल वृक्ष की छाया में कितने नव-अंकुर पले गये
दुर्भाग्य सियासत भारत की सब धीरे-धीरे भले गये
भारत माता की चिन्ता में श्री अटल बिहारी गले गये

बस यही वेदना थी दिल मे भारत स्वालम्बी हो जाये
ये अहिसुष्णता भारत की ना फिर से लम्बी हो जाये
जो अंग – भंग बदरंग हुआ, उसका उपचार जरूरी है
सत्ता से कटुता ह ट जाये, जनता की इच्छा पूरी है

सरहद में फिर से प्रेम बढ़े, भ्रातृत्व प्रेम की यारी हो
ये आतंकवाद की परिपाठी ना मानवता पर भारी हो
दिल दरिया से मिल जाये, जल सरिता का ना खारी हो
मिलना जुलना भी ऐसा हो,दिल में दरिया दिलदारी हो

शब्द अटल के गौर करो,भांषा भी अटल की अपनाओ
चाल,चरित्र और चेहरों मे बस अटल बिहारी दिखलाओ
प्रतिभा पर चिन्तन हो ,ये सत्ता का ना सिरमोर बने
हो वही आचरण हर नेता का,ना कर्कसता का शोर बने

कवि-श्रेष्ठ को नमन मेरा,जो भारत भाल का ताज बना
शब्दो के प्रखर प्रहारों का,जो शब्द-भेदी सरताज बना
स्वछन्द स्वरो की सरगम का निःशब्द-शब्द स्वर साज बना
यहां कवि आग नतमस्तक है,वो अटल में अल्फाज बना।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815

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