#Kavita by Rajendra Bahuguna

इस कवि-श्रेष्ठ पर क्या बाेलूँ

 

शव अटल  सा  था  पड़ा, लोग कहते मर गया

थक गया लम्बे सफर से,आज अपने घर गया

चाल ,र्चिरत्र और   चेहरा   हो तो अटल बिहारी जैसा हो

सत्ता का सिर पर  सेहरा  हो जो अटल बिहारी जैसा हो

तुफान शान्त सा   ठहरा  हो तो अटल  बिहारी जैसा हो

अनुभव जीवन  का  गहरा हो तो अटल बिहारी जैसा हो

 

सत्ता पाने की होड़ नही, कंही  पी.एम.पद  की दौड़ नही

भाषा में तोड़ मरोड़ नही, कंही छल, कपटो का कोढ़ नही

असत्य शब्द गठजोड़ नही ,विस्फोट शब्द का फोड़ नही

जीवन में भी कंही  मोड़ नही,सरिता,सागर का तोड़ नही

 

सिंहनाद सी गर्जन की भांषा,कुत्सित  पीड़ा से मौन हुयी

वो राष्ट-प्रेम की अभिलाशा  भी असमंजस में  मौन हुयी

अखण्ड राष्ट्र् की परिभांषा  की दूर-दृष्टि  क्यों मौन हुयी

राजनीति की अभिव्यक्ति की शूर  श्रृष्टि क्यों मौन हुयी

 

सात दशक  की  सत्ता  में  रणवीर  लड़ा किसके खातिर

जीवन पर्यन्त अरिहन्त खड़ा मालूम नही किसके खातिर

आर.एस.एस, बी.जे.पी.मे  भगवन्त खड़ा किसके खातिर

संसद  की  चार  दीवारों  में ये सन्त खड़ा किसके खातिर

 

इस अजात शत्रु की मृत्यु पर यदि भीख सियासत लेती है

शब्दो के  स्वर,सुर-संगम की यदि लीक सियासत लेती है

जिसका अपना कोई गैर नही ,तकनीक  सियासत लेती है

कवि आग अच्छा  होगा  यदि  ये सीख  सियासत लेती है।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

9897399815

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