#Kavita by Rajendra Bahuguna

डालर ने पकड़ा कालर
मैं अमरीका हूँ मेरा डालर अश्वमेघ सा दौड़ रहा है
धीरे-धीरे विश्व जगत की हर मुद्रा को तोड़ रहा है
भूखे-नंगे राष्ट्र जगत के खुद मुझसे ही जोड़ रहा है
अर्थ जगत में मेरा डालर ही विस्फोटक फोड़ रहा है

मोदी से यारी की मैंने जिसको दुश्मन मान रहा था
प्रारम्भ से पाकिस्तानी हर हरकत मैं पहचान रहा था
गुप्त रूप से उसको भी मै साथ मे लेकर ही चलता हूँ
ये भी मेरी रणनीती है अब किसको मै कैसे छलता हूँ

मेरा तो बस एक लक्ष्य है चीन को धरती में गाढूंगा
मै इस एशिया महाद्धीप को अपने ही ढंग से फाढूंगा
मेरी सफल योजना होगी, मोदी जैसा यार मिला है
बम से भी घातक मुझको भारत का हथियार मिला है

शान्तिदूत भारत का कन्धा अब मै ही उपयोग करूँगा
दुनिया भर के हर दशों में मैं अपना विनियोग करूँगा
इसिलिये तो अर्थ-व्यवस्था डालर से मै काट रहा हूँ
बलि-कर्ण सा दानी बनकर भीख सभी को बाँट रहा हूँ

भारत की मुद्रा का रूपया मेरे सन्मुख नतमस्तक है
तेल,गैस और डीजल में भी मेरे डालर की दस्तक है
भारत का उद्योग जगत तो खूनी हडडी चूस रहा है
यहां सरकारो की मजबूरी हेै ये चन्दा केवल घूस रहा हेै

दस-बीस घरानो के बीहड़ ही राजनीति को पाल रहे हैं
इस मंहगायी,भुखमरी,गरीबी से ही माया खंगाल रहे है
नोट बन्दी का जी.एस.टी. का सट्टा मेैं ही खिलवाता हूँ
यहां मेरे कारण जो मरता है फिर मैं उसके घर जाता हूँ

अब मेरा डालर रामराज्य की दशा को भारत में लायेगा
यहा बैलों से ही खेत जुतेगा,बैल गाडि़याँ चलवायेगा
बस,मोदी की आँखो में मै माया की पर्त्ते चढ़ा रहा हूँ
मैं कवि आग हूँ आने वाला संकट लिखकर पढ़ा रहा हू।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815

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