#Kavita by Rajendra Bahuguna

हे ,पैट्रोल- अब कुछ तो बोल
जब गैस सिलेन्डर स्मृतिरानी,सुषमा माता ने ढोया था
राम-भक्त ने पेट्रोल,डीजल का रोना घर-घर रोया था
वही भक्त अब सिंहासन की कुर्सि में जमकर ऐंठे हैं
मनमोहन से पी.एम.मोदी अब मौन हुये तनकर बैठे हैं

पैटोल,डीजल अर्थशास्त्र को अरूण जेतली समझाते थे
रविशंकर तो मनमोहन पर प्रश्नचिहन ही लगवाते थे
सुषमा माता चौराहो पर ठुमक-ठुमक कर नाच रही थी
तुलसी माता हर आँगन में सास-बहु को बांच रही थी

जुमलों वाली उस भांषा के मुंह में अब आवाज नही है
पूरे देश में आग लगी है कहीं किसी को खाज नही है
दो हजार उन्नीस के सपने धृतराष्ट्र सब देख रहे हैं
महंगायी का कफन सियासी हम मुर्दो पर फैक रहे हैं

अमितशाह भी घटोत्कक्ष का रूप लिये रण में आयेगा
फिर चक्र-सुर्दशन लेकर मोदी हर-हर महादेव गायेगा
बी.जे.पी. की सारी नारी मिल गीत सुमंगल के गायेंगी
प्रजातन्त्र के हम मुर्दो को मंहगायी फिर से भायेगी

बे-रोजगार युवा लावारिस यहां झण्डे-डण्डे फिर ढोयेंगे
सारे दल अब अपने साजों को एक बार फिर संजोयेंगे
सबको लेकर साथ चलेंगे, अच्छे दिन फिर से गायेंगे
अब अमित शाह कहते है मुर्दो देखो हम फिर से आयेंगे

आरएसएस.अब हिन्दू-मुस्लिम का डीएनए जोड़ रही है
अब कुरूआन को गीता,रामायण के पथ पर मोड़ रही है
अल्लाह, ईश्वर के भक्तों को अपने ढंग से तोड़ रही है
यहां मूँह में राम-बगल में छूरी,उँची-उँची छोड़ रही है

हिन्दू-मुस्लिम खूब चलेगा,मन्दिर-मस्जिद लहरायेृगा
दलित-सवर्ण के विषमन्थन से आरक्षित वोटर आयेगा
देश की जनता मुर्दा होकर फिर भी तो चुपचाप खड़ी है
कवि आग इस प्रजातन्त्र में मुर्दो की आलाप घडी है।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो0 9897399815

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