#Kavita by Rajendra Bahuguna

बस,यही काम अब बाकी है
दो हजार उन्नीस में भारत-पाक युद्ध फिर से होना है
इस राजनीति में बलिदानो का सत्ता एक खिलौना है
यहां बे-रोजगारी, मंहगायी को और कहां तक ढोना है
अभी तो आगे देखो भैय्या क्या-क्या हमने खोना है

हिन्दू,मुस्लिम को समझाना सबके बस की बात नही है
ये सारी जनता एक कर सके नेता की औकात नही है
यहां भारत-पाकिस्तान युद्ध ही हमको एक बनाता है
यही नुक्ता फिर चुनाव जीतने का कारण बन जाता है

हम भारत के हर चुनाव में क्यों पाकिस्तान को लाते हैं
फिर पाकिस्तानी भी हर चुनाव में भारत पर गुर्राते हैं
ज्यादा चिल्लाने वालों की वहां सरकारे बनती जाती हैं
यहां हर चुनाव में काशमीर की राजनीति रंग लाती हैं

ये नोट बन्दी,ये जी.एस.टी, ये जन-धन खाता कहता है
इस राजनीति का दरिया हरदम युद्ध भूमि में बहता है
यहां अहिसुष्णता फैल रही है,नेता फिर क्यों सहता है
इन राजनीति का लक्ष्य हमेशा कुर्सि पर ही रहता है

यहां सात दशक से हर चुनाव में पाकिस्तान सहायक है
फिर बीच-बीच में कंही-कंहीं पर चीन देश खलनायक है
कंही बंग्ला देशी घुसपैंठ का मसला भी सामने आता है
इन सब मुद्दों का इस प्रजातन्त्र में वोट-बैंक से नाता है

फिर मोदी का परदेश में जाना,सहानुभूति बतलाती है
इस आतंकवाद पर सब देशों की मूक सहमती आती है
ये राजनीती की कूटनीति का मन्त्र है सत्ता पाने का
ये भी तो शातिर नुक्ता है इस जनमत को गर्माने का

भारत का मुस्लिम राजी है अब भारत की चौकीदारी में
यहां जति, कौम, कबीलो को विस्वास नही गद्दारी में
फिर सभी विरोधी एक साथ हैं पाक का दंश मिटान मेें
पूरा भारत साथ खडा है यहा राष्ट्र- भक्ति को गाने में

इस सर्जिकल स्ट्राइक के कितने अब श्राद्ध मनाओगे
गरूड़ पुराण की गाथा को सरहद पर कब तक गाओगे
उन पाकिस्तानी मुर्दो की अब कितनी ढाल बनाओगे
दो हजार उन्नीस में भी तुम कफन शवों के लाओगे

यहां ये मेरी रचना कालजयी है जो देखेगी वो बोलेगी
हर दूर-दृष्टि की कवितायें ये आभाष हमेशा खोलेंगी
यहां मौत का मञ्जर देख रहा हूँ,सरहद के तूफानो मेंं
अब कवि आग की दृष्टि है,इस राजनीति अनुमानो में।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815

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