#Kavita by Rajendra Bahuguna

सूभाष का उपहास
हम सूभाष की भांषा के भारत वाशी हैं
ये मेरा हिन्दुस्तान मेरा मथुरा काशी है
इस आजादी के चक्रव्यूह को रचने वाला
आजादहिन्द का बोष कहां है वो मतवाला

तूने जिन्दे राष्ट्र-भक्त की फौज बनायी
बस,तेरे कारण अंग्रेजों नें मुंह की खायी
दुर्भाग्य देश का मुर्दों के मुंह पर निन्दा है
सूभाष चन्द्र आज भी भारत में जिन्दा है

क्यों आज राष्ट्र में डाकू झण्डा फहराते हैं
क्यों छंटे- छटाये गुण्डे मंञ्चो पर आते हैं
ये खादी कुर्ता केवल भाषण झाड़ रहा है
महापरूषों को कबर में जिन्दा गाढ़ रहा है

आज सियासी लाश बोष की छान रहे हेै
जब जिन्दा था,तब उससे अनजान रहे है
आदर घर में मिलता, तो क्यो बाहर जाता
किस मूंह से अब जोड़ रहे हो उससे नाता

मरी हुयी लाशों के अब मत कफन उठाओ
उस मिट्टी को ना छेडो, मत आग लगाओ
हम सूभाष की बात करे,औकात नही है
अब इस भारत में वीरो के जज्बात नही है

राजनीति मे अब कितना उपयोग करोगे
उन वीर शहीदो से कब तक उद्योग करोगे
बुनियादो के पत्थर पर मत सेध लगाओ
तुम बस, भारत को लूटो, मिलकर खाओ

आजाद हिन्द की वर्ष गांठ क्या वोट बैंक है
अब ये दीवाने क्या चुनाव के तोप-टैंक है
लाशों के उपर कब तक झण्डा फहराओगे
क्या गऊ,गंगा,मन्दिर से ही सत्ता पाओगे

राष्ट्र प्रेम की भाव भंगिमा दिल में लाओ
प्रतिमा गौण करो प्रतिभा पर पुष्प चढाओ
राष्ट्रभक्ति संस्कार समर्पित शिशू बनाओ
सूभाष,भगत का भारत हो कुछ ऐसा गाओ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815

Leave a Reply

Your email address will not be published.