#Kavita by Rajendra Bahuguna

अब क्या ऐसा ही होता रहेगा ।.

गौवंश या विध्वंश
अब तो यू.पी.में पुलिस मरने लगी है
ये सियासम कत्ल भी करने लगी हेेै
भीड़ से जनता भी अब डरने लगी हेैं
क्या गाय माँ रक्त भी चरने लगी है

अस्तियों से बस्तियां ही जल रही हेैं
गाय से अहिसुष्ण पीढ़ी पल रही है
हिन्दुओं की आस्था को छल रही है
ये साम्प्रदायिकता हमें भी खल रही है

गौभक्त भी आसक्त होते आ रहे है
विरक्त भी सत्ता को ढोते आ रहे है
हम धर्म-पथ पर शूल बोते आ रहे है
आध्यात्म मे तोते ही तोते आरहे है

हर चुनाव मेंयोगी सी.एम.मदमस्त हेै
सत्ता को पाने में हूकूमत व्यस्त है
क्यों सम्प्रदायी भीड़ भी अभ्यस्थ हेै
जो जो मरगये परिवार उनका त्रस्त है

क्यों हर चैनलो में कूतर्क की बौछार हेै
किस दुर्भाग्य से सरकार भी लाचार हेै
अब विश्वहिन्दू परिषद यहा औजार हेै
ये बजरग दल तो द्धन्द का आधार है

बे-वजह ये मौत सब कुछ बोलती हेै
क्या सियासत सत्यता को खोलती हेै
सल्तनत जनमत जहर का घोलती है
अब सम्प्रदायो मे सियासत डोलती है

ये नरसंहार का रण बन्द होना चाहिये
बस ,प्यार का मकरन्द होना चाहिये
अब हर मजहब स्वछन्द होना चाहिये
कवि आग बस, आनन्द होना चाहिये ।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
मो09897399815

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