#Kavita By Rajendra Bahuguna

प्रजातन्त्र की महिमा गाओ
प्रजातन्त्र की बन्जर धरती जुमलों की बरसात सहेगी
अब ये राजनीति निर्बीज बीज से हरियाली की बात कहेगी
डेढ़ अरब की मुर्दा जनता कफन ओढ़ कर साथ बहेगी
यहां हर चुनाव की जनमत गणना,जना की औात कहेगी

अब सत्ताधारी बालाकोट के रण से परचम फहरायेंगें
गुणगान सियासी छप्पन इञ्ची सीने का खुलकर गायेंगें
यहां रफायल डील के घूसकाण्ड को राहुल बाबा लहरयेंगे
बस,इस चुनाव में फिर से जुमले,नये-नये मुद्दे गर्मायेंगे

दो-दो घण्टे अपना मोदी जगह-जगह भाषण झाड़ेगा
हर जुमलों को औजार बनाकर अपने ही झण्डे गाड़ेगा
शब्दों के खञ्जर के मञ्जर से प्रतिद्धन्दी को ताड़ेगा
फिर छल,बल,कपटी हथियारों से नेता-नेता को फाड़ेगा

राजनीति के इस सर्कस को मतिमन्द जनता देखेगी
आस निरास की निर्जन आँखे अश्रुबिन्दु फिर से फैंकेगी
अब हम मुर्दों के कफन बिकेंगे जनमत के हर चौराहे पर
बस, यही खेल हर बार चलेगा, जुमले बाजों के साये में

फिर से बे-रोजगारी, मंहगायी के सारे मुद्दे दबजायेंगे
केवल आतंकी,घुसपैठ,सरहद के, जनता में मुद्दे छायेंगे
राष्ट्र-भक्ति प्रशिक्षण होगा, सरकस के कर्कस नारों से
मन्दिर,मस्जिद, गऊ, गंगा के भजन सुनेगे अवतारो से

सब दल बदलू परवान चढ़ेंगें,पद के मद की अभिलाशा से
सत्ता पर फिर अंकुश होगा, मुंगेरीलाल की हर आशा से
पांच साल तक फिर से जनता रोयेगी जुमला ,झांसा से
कवि आग अब ये देश लुटेगा, राजनीति की परिभाषा से।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)
मो0 9897399815

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