#Kavita By Rajendra Bahuguna

राजनीति के झण्डे ढोलो
आओ बच्चों राजनीति हम मिलकर खेलें
डेढ अरब की भीडों को सब मिलकर झेलें
हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, इसाई अपने चेले
यहां ये प्रजातन्त्र के कीडे हेैं सारे अलबेले

ये बीज सनातन हमने हर युग में बोया है
छल ,बल, कपटों से आचरण भी खोया है
यहां राम,कृष्ण,महावीर,बुद्ध हमसे रोया है
हमने फिर भी ये राष्ट्र सुरक्षित संजोया है

यहां तुलसी, मीरा,और कबीरा हार गये हेेैं
सूभाष,भगत,गांधी को भी हम मार गये हैं
हम रावण,कंस,दुशासन के भी पार गये हेैं
हम अहिसुष्णता की हर सीमा तार गये हैं

यहां ये बे-रोजगारी,मंहगायी तो सौगाते हैं
हम नई पीढी को चोर चकारी सिखलाते हेैं
ये सम्प्रदाय,मजहब भी हमसे ही आते हैं
तभी तो कीडे राजनीति की धुन गाते हैं

ये नीरव,माल्या,मोदी हमी तो पाल रहे हैं
तभी तो जी.एस.टी.हम तुम पर डाल रहे है
नोटबन्दी ओैर कालेधन का क्या कारण है
अब राजनीति प्रत्यक्ष यहां पर उदाहरण हेै

मन्दिर,मस्जिद सत्ता को वरदान मिला है
मुल्ला, पण्डित,जोगी गौेरव-गान मिला हेै
हम नेताओं को हरा भरा मरूधान मिला है
पुण्य किये थे तभी तो हिन्दुस्तान मिला हेै

ये राजनीति के दल अपने मथुरा काशी हेैं
हर दल मे नेता की पुजा अच्छी-खासी हेै
यहां ठाकुर,पण्डित,जैन,बुद्ध, कुर्मी,पासी हेै
ये डेढ अरब की जनता अपनी ही दासी है

हे डेढ अरब के कीडो, बिच्छू, सर्प,सपोंलो
पढना,लिखना छोडो बस,अपने संग होलो
अब हम जैसे अपशिष्ठो को कन्धे में ढोलो
थोड तुम भी कवि आग के संग में रोलो।।
राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)
9897399815

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