#Kavita by Rajendra Bahuguna

शायद इस रचना को पढ कर नेताओं में कुछ जागृति आ जाये।

अब नेता नही,किन्नर

हमें   नेता  बनादो   तुम  हम   वो  कर  दिखायेगें

वतन  की  आबरू   पर   भी मिटेगे  मर दिखायेगें

झाडू   ही   लगाना  है   तो  सरहद  पर   लगायेगें

सुषमा  ने  कहा था  हम  दश  नर – मुण्ड  लायेगें

 

अब तुम चूडियाँ  पहनो  हूकूमत  छोड दो  हम पर

भरोसा करके देखो तो,इस किन्नर के दमखम पर

ना  आगे  है  ना  पीछे  है, वतन को  हम बचायेगें

तिरंगा हाथ में  दे  दो, हम कंराची तक  फहरायेगें

 

पाकिस्तान  की  हरकत  से, कितने  घर उजाडोगे

सियासत की सडक परअब कंहा तक तुम दहाडोगे

भरोसा  खो  चुकी  जनता, इन खादी के नमूनो से

अब ये सरहद लाल होती है क्यों फौजो के खूनो से

 

ये पाकिस्तान और चीनी भी, हमला रोज करते हैं

यहा सियासी  कारनामे तो, अब सबको अखरते हैं

क्या ये  नैपाल मण्डी  है, बस,खुले बाजार में घूमों

क्या  खाला  का  घर  है  ये, जंहा चाहो  वंहा झूमो

 

हम नाचेगें भी  गायेगें  भी, पर भारत को बचायेगें

यदि हमें मौेका मिलेगा तो,हम पाकिस्तान जायेगें

हम जूते  चार   मारेगें, उन शरीफो  के नवाजों को

कुचल  कर आयेगें उनके तवायफ तख्त,ताजों को

 

इन अलगाव  वादी को  अब  ठिकाने  हम  लगायें

इन्हे   हिजडा   बना  करके  सरहद   पर  नचायेंगें

दाडी नोच  कर  हाफिज  की हम   सलवार  फाडेंगें

नंगा  करके   भडुवों   को    कंराची  में   ही गाढेंगें

 

तुम्हारी  इस  कूटनीति  से  यंहा  आवाम मरता हेै

तुम्हारा  ये   तरीका   भी   हम  सबको अखरता है

तुम्हारी बात सुन करके, यंहा कुछ  आस जागी थी

ये इतिहास  कहता है  कि ये सत्ता  ही अभागी थी

 

तुम्हें अब  है कंहा  फुरसत,भारत माँ  की छाती की

नेता  को  तो  चिन्ता  हेेै ,वतन में और  ख्याति की

अब वजीरों  का  चौराहो  में  चिल्लाना  अखरता हैेे

सरहद  का  सिपाही   क्यों  ,यंहा  बे-मौत मरता है

 

इस भारत  मां  ने  सरहद  के  हजारों  शेर  खोये है

इन  पाकिस्तान  के   भडुवों ने  कैसे  बीज  बोये हैं

हमें  भी  दर्द   होता  है,  जब   कोई   वीर  मरता है

क्यों सत्तर साल  से मुर्दा,ये  हरकत रोज करता है

 

किन्नर हैं,ना हिन्दू हैें,ना  मुस्लिम हेैं सियासत में

हमें तो  नाच, गाना  ही  मिला  हैे  इस विरासत में

वतन   की  रोटियां  खाकर  हम  जीवन  चलाते हेैं

हम  ना  मर्द   होकर  भी  वतन   के  गीत  गाते है

 

जब  हमारी  फौज  मरती  है,हमारा खून जलता है

यहां अलगाव-वादी क्यों   सियासत से ही पलता है

तुम्हे मुफ्ती  की  युक्ति में क्या कुछ रास आता है

क्यों  हाफिज  कमीना  ही धुन कश्मीर की गाता है

 

हमें  बस ,एक  मौका  दो  कुछ  करके  दिखाने का

हमें  बस  एक  मौका  दो , माँ   का  दर्द   गाने का

हम  फौजों   साये  में  ही ,वो  कुछ  कर  दिखायेगें

जो  तुम  में  बुझी  है  आग  वो  ,फिर  से जगायेगे।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

मो0 9897399815

Leave a Reply

Your email address will not be published.