#Kavita by Rajendra Bahuguna

अब राम नही कोहराम

निकल पडे  हैं हम रथ लेकर फिर से आग लगाने को

तीन  दशक  से लालाहित  थे  हम सत्ता को पाने को

कांग्रेस का भारत में अब किसी प्रान्त  में नाम नही है

हमको  तो  सत्ता  पानी  थी  दीन नही इमान नही है

छल,बल,कपटी  राजनीति  है शदियो  से ही हरामी है

निकल पडे हैं हम  रथ लेकर  सत पथ के अनुगामी हेै

 

बे-रोजगारी,भुखमरी ,गरीबी  का  हमसे क्या नाता हेै

यहां अपना घर तो राम नाम के चन्दे  से भर जाता हेै

ये युवक देश के  भटक रहे हैं अपना साथ निभाने को

अब काम नही है,धाम नही  है तत्पर  है सब आने को

इस हिन्दू धर्म की रक्षा मेें अब हम हीअमला जामी है

निकल पडे  हैं  हम रथ लेकर सत पथ के अनुगामी हेै

 

बात करेंगे  हम  विकास   की सबका साथ निभाना है

अन्तर मन में एक तरंग है  बस, हिन्दू-हिन्दू गाना है

हर प्रान्त में अपना सासन, छल,बल,कपट से लाना हेै

फिर राम  लला  चाहे  दुख भोगें ,हमे हूकूमत पाना है

अपना पी.एम.गद्दी पर है अब,ये और सभी बे नामी है

निकल पडे  है  हम रथ लेकर सत पथ के अनुगामी हेै

 

इसीलिये  तो  हर चैनल में हिन्दू,मुस्लिम लडवाते हैं

इन धर्मो की औकात मिडिया में खुलकर दिखलाते हेै

फिर षडयन्त्रो के तर्को में भी मुशलमान फँस जाता है

यही मीडिया अपना प्रतिशत  बहुमत में दिखलाता है

इस काम में कट्टर-पन्थी  बस, हम  ही नामी-ग्रामी है

निकल पडे  हैं हम  रथ लेकर सत पथ के अनुगामी हेै

 

हम सरहद  पर  गिरती  लाशों  का पूरा लाभ उठाते हेैं

हम हर शहीद के  कफनो से भी वोट खींच कर लाते हेैं

इस नाटक में प्रतिष्प्रधा  में  सबको पीछे छोड चुके हैं

हर घटना का आज  ठीकरा  प्रतिपक्ष  पर फोड चुके हैं

यहां आज देश  में  अपना  चेहरा  कट्टर पन सद्दामी है

निकल पडे  हैं  हम रथ लेकर सत पथ के अनुगामी हेै

 

गऊ हत्या  की  आड  में  हमने क्या उत्पात मचाया है

सुरभी के  सम्मान  में हमने  भजन  सियासी गाया है

राम जन्म-भूमि में हमने कुछ भटके  मुल्ले तोड दिये

तीनतलाक से मुस्लिम नारी के जनमत भी जोड दिये

यहां आज देश की  बागडोर  बस  हमने ही तो थामी है

निकल पडे  हैं  हम रथ लेकर  सत पथ के अनुगामी हेै

 

ये पढा लिखा यौवन  भारत  का आज पकौडे तलता है

राज्य सभा में अमित शाह  का  मन मयूर मचलता है

वो डिप्लोमा धारी यौवन  का  स्वाभिमान बतलाता हेै

ये युवक देश का इन्ही के झण्डे फिर भी ढोता जाता है

कवि आग  इस  प्रजातन्त्र  में जन्म-जात  ये खामी है

निकल पडे  हैं  हम रथ लेकर  सत पथ के अनुगामी हेै।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

9897399815

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