#Kavita by Rajendra Bahuguna

फूल में शूल

अब मेरे देश  के   बच्चे   सब  बर्बाद हो गये

ये राजनीति की धरती  में  सब खाद हो गये

ये विश्व विद्धालय सरहद के उन्माद हो गये

शार्गिद छात्र हैं,ये  नेता  सब उस्ताद हो गये

 

अलगाव वाद के गीत स्वरों  को  सुलगाते हेैं

अब  राष्ट्र-गीत संकाय स्वंय  के  ही गाते हैं

गुरू जी भी  सुरताल  की  धुन में नाच रहे हैं

यंहा भविष्य  देश का  नेता ही तों बांच रहे है

 

भारत  के  नेताओं  को  फिर भी शर्म नही है

अब विद्धा ददाति विनयम का ये धर्म नही है

क्या बच्चों का  पढना ही  कोई  कर्म नही है

इस गुलशन में फूल खिलें क्या  मर्म नही है

 

डेढ अरब  की  जनता  को कुछ ज्ञान नही है

क्या भविष्य है  बच्चों  का  अनुमान नही है

राजनीति का शास्त्र पढा ,क्या  हल निकला

ये कैसा इतिहास सढा फिर निष्फल निकला

 

राजनीति   का  विषय  पढाया क्यों जाता है

अब वैमनस्य  प्रतिवाद बढाया क्यों जाता हेै

यंहा  द्धिपक्षीय  जेहाद लडाया  क्यों जाता है

इस मन्दिर में बलिदानचढाया क्यों जाता है

 

ये सब गुरूकुल और मदरसे पहले भी होते थे

शिष्य , समर्पित गुरूओं  पर  जीवन खोते थे

सब गुरू समाज के  हर पहलू को समझाते थे

आदर्श शिशू ही  शिक्षित  गुरूकुल से आते थे

 

आज भविष्य का  बच्चों को अनुमान नही है

उन र्निणायक लक्ष्यों  का  कुछ  ज्ञान नही है

सब जीवन के  बहुमुल्य क्षणों को काट रहे हेैं

हम श्वान  सरीके ,घाव  स्वंय  के चाट रहे हैं

 

यंहा राजनीति कब से नव-अंकुर चाट रही है

क्यों सम्प्रदाय,मजहब में  शिक्षा बांट रही है

बुद्धि-बल्लभ शव  सारे क्यों  निष्प्राण पढे हैं

क्यों वाणी-भूषण  के  शिक्षा में अलग धडे हेैं

 

हर विद्धालय से  राजनीति  के विषय हटाओ

ये शिक्षा कुछ आदर्श  बने  वो चिन्तन लाओ

इन शिक्षालय में  अगर यूं  ही उन्माद चढेगा

यंहा कवि आग  जेहाद  अभी परवान बढेगा।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

9897399815

 

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