#Kavita by Rajendra Bahuguna

सरकारी खेैरात की शिक्षा

अब  मेरे  बच्चे सरकारी  स्कूल में  सढ़ने जाते हेैं

कुछ मजबूरी में  मध्य-वर्ग के बच्चे पढ़ने जाते हेैं

ये धनीवर्ग के  सारे बच्चे  छाती  में चढ़ने जाते है

हम सब अपने पागल मन के सपने गढ़ने जाते है

 

रोजगार के  भारत मे़ं जगह-जगह अम्बार लगे हैं

शिक्षा,दीक्षा और समीक्षा से हीहम हर बार ठगे है

आज देश में शिक्षा  से  ही चोंरी भ्रष्टाचार  जगे हेै

प्रजातन्त्र  में  जुमले बाजी नेता के सरदार सगे हैं

 

एमबीबीएस की भी डीग्री एक करोड़ में मिलती हेै

50 लाख में इंजीनियरिंग  की बुनियादें हिलती है

एमबीए,एमसीए. की भी कली लाख में खिलती है

शिक्षा से जो  हम जेसों की हडडी रोज पिघलती है

 

अनपढ,भौदू,चोर, उचक्के  शिक्षा के व्यवसायी है

चाल,चरित्र और चेहरे भी तो इन्ही के साढू भाई है

दिन दुनी और रात चौगुनी शिक्षा आज कमायी है

मेरे देश  की  सब  प्रतिभायें  शिक्षा ने ही खायी है

 

शिक्षा अब  उपभोग  नही, उद्धोग दिखायी देती है

नई पीढी की शिक्षा अब महारोग  दिखायी देती है

नेता को भी  महामारी के संक्रामक का ज्ञान नही

गुरूकुल और  मदरसों  का ये वो हिन्दुस्तान नही

 

सरकारी खेैरात  का भोजन दीन के बच्चे खाते हेैं

यहां गरीब  के बच्चे, भोजन माता  के हो जाते हेैं

आज देश मे राष्ट्र-गीत भी  बस,नंगे-भूखे गाते हेैं

नेता जी भी विश्व गुरू के भजन हमे सिखलाते है

 

एक ही शिक्षा प्रणाली  हो  अब ऐसी औकात नही

फिर से गुरूकुल स्थापित हो ऐसे भी जज्बात नही

नेताओ मे  शिक्षा के  प्रति  आदर वाली जात नही

कवि आग की  कविता  में सत्ता की सोैगात नही।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

9897399815

 

 

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