#Kavita by Rajendra Bahuguna

बडे़ नोट कहां गये।

 

मैं तो अगवा हो चुका हूँ  खुद इन डाकुओं  के हाथ मेंं

क्यों फंस गया ये गांधी  बेचारा, बे-वजह मेरे साथ में

यहां छप रहा हूँ रात दिन फिर भी नजर आता नही हूँ

व्यभिचार की दुनिया को मैं भी छोड़कर जाता नही हूँ

 

नोट की महिमा

धन्य   है   वो    आदमी  जिसने  बनाया   नोट है

आज  की  दुनिया  में  धन  परमात्मा  पर चोट है

धन धरम है  धन  करम  है  धन  जमी  जागीर है

धन वार है धन  पार  है   धन  धर्म  की  तस्वीर है

 

भगवान का मन्दिर  बनाने  के  लिये धन चाहिये

मक्का, मदीना,हज में जाने के लिये  धन चाहिये

ध्यान  करना  है  प्रभू  का  ध्यान  में धन चाहिये

अपमान  करना  है प्रभू  का ज्ञान  में धन चाहिये

 

चर्च,मन्दिर,मस्जिदें  भी आड. में धन के खडी है

सम्प्रदायों की  जमी  की  नींव  भी धन से पडी है

धन  से  जो  सम्पन्न  है वो राष्ट्र  बनता जायेगा

मेरा वतन सौ राष्ट्र और महाराष्ट्र ही कह लायेगा

 

धन के  कारण हर मजहब आज आगे बढ. रहा है

धन के कारण आदमी अब चांद पर भी चढ रहा है

धन धूरी  है धाम   की परमात्मा  बिन चल रही है

श्रृष्टी की पूरी व्यवस्था  भी  धनिक से पल रही है

 

धन के बिना भगवान  मन्दिर में नजर आता नही

नंगा  मनुष्य  भगवान  को  भी धर्म में भाता नहीं

अब दीनता  में  भक्त  भी भगवान को गाता नहीं

घर  में  गरीबों  के  कभी  भगवान  भी जाता नहीं

 

धन  ही  सहारा  बन  गया हर  आदमी का देश में

बस,लक्ष्य  है धन  प्राप्ती  चाहे  किसी  भी भेष में

जाने  कितने  मर  रहे  कितनों को अगुवा कर रहे

शैतान है हर शख्सियत धन  से  धरम को चर रहे

 

प्रजातन्त्र  के  बाजार में  चुनाव  मंहगा हो  रहा है

लक्ष्य  दिल्ली  का  बना कर  देख  नेता रो  रहा है

पंञ्च  और   पंञ्चायतें , प्रधान   बिकते  लाख में

इस  राजनीति  में   करोडो  रोज  मिलते खाक में

 

मुद्रा बदलकर क्या करोगे , इस डाकुओं के देश में

अब  हो रहा है धन धवल  इस राजनितिक भेष में

क्यों कष्ट में केवल  गरीबी, धन  भुनाने  के लिये

हर  धनपति तैय्यार  बैठा  धन  कमाने  के  लिये

 

न्याय के मन्दिर  मे भी  धन की थैली चढ रही हैं

धन के कारण  न्यायाधीशों की जमातें लड रही हैं

राजनीति धन के  कारण भ्रष्ट-पथ पर सड रही है

धन के कारण पद, प्रतिष्ठा डाकुओं की बढ रही है

 

फिर भी चोरी कर रहा है, कू-कर्मी  अन्धा आदमी

अब  कर रहा  है लाल वस्त्रों में  भी धन्धा आदमी

इन छल,कपट, कालेधनो से  देश बिकता जायेगा

इस आदमी की हरकतें अब आग लिखता जायेगा।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

9897399815

 

 

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