#Kavita by Rajendra Bahuguna

लन्दन में क्रन्दन

तुम चूनाव  लडोगे  भारत में विज्ञापन होगा लन्दन से

हम प्रश्न पूछना चाहते हेै इस राष्ट्रभक्ति के नन्दन से

कब  छूटोगे  झूठ,कपट, छल जुमलों के इस बन्धन से

यहां क्यों लिपटे है सर्प विषैले प्रजातन्त्र वट चन्दन से

 

प्रायोजित  प्रश्नो  के  उत्तर सब चैनल हमें दिखाते हैं

वहां चारण ही प्रश्न उठाते हैं चारण ही कविता गाते हैं

वहा अन्ध-भक्त की  भीडें भी तारीफ स्वरो से गाती हेैं

भक्त-मण्डली  भारत की  दामोदर की कथा सुनाती है

 

यहां ढाई घण्टे  के  अभिनय से ये पिक्चर पूरी होती है

क्यों आधे  भारत की  जनता,दुःख दर्द यहां संजोती है

आज सियासत  अभिनय से  क्यों अहिसुण्ता  बोती है

मोदी  के  लन्दन  नाटक से यहां भारत  माता रोती है

 

कब तक तृष्कार करोगे तुम इस भारत का परदेशों में

तुम कितनी इज्जत  पाओगे दुनिया के छद्म नरेशों में

जिसने हमको श्वान  कहा  वहां जाकर पूंछ हिलाते हो

हत्यारे  हेैं  जो इस भारत  के तुम उनकी रोटी खाते हो

 

जिसने भारत  को  खण्ड किया,पाकिस्तान बना डाला

जिनके कारण  भारत के  मूँह पर था लगा हुआ ताला

भारत  के  वीर  सपूतों  की तो  देश बना था वधशाला

आज  वही  महारानी  क्यों बनती है पी.एम की खाला

 

ये झूठी आत्म  प्रशंशा की अब हरकत रास नही आती

जुमलों की झूठी भांषा में भी सत् की  बांस नही आती

अच्छे दिन की किञ्चित भी हमको तोअाश नहीआती

इन लम्बे-लम्बे  भाषण  में अब रूची खास नही आती

 

प्रजातन्त्र इस अभिनय का ये नाटक कब तक झेलेगा

इस राजनीति के जोकर का किरदार कहां तक खेलेगा

कुछ बेरोजगारी,मंहगायी,और बलात्कार पर गौर करो

कवि आग  इन  शब्दो से ना झूठ,कपट,छल,शोर करो।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

मो0 9897399815

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