#Kavita by Rajendra Bahuguna

यह रचना कट्टर हिन्दू व कट्टर मुशलमानो के लिये नही है वरन् आदर्श हिन्दू व आदर्श मुशलमान हिन्दुस्तानी के लिये है।

आडम्बर मेंं फंंसे राम-रावण

गरिमा  गिरायी राम  की भक्त  ने  इस  देश में

देख   लो   लंकेश  को अब  राम  ही  के  भेष में

राजनितिक   द्धन्द  से   राम  कलुषित हो गया

क्यों  रावणों  के राज  में रघुवंश  पूरा  खो गया

 

राम  की  गति  देख कर हनुमान भी तो मौन है

स्तब्ध  है  बजरंग  भी, बजरंंग  दल ये  कौन है

जंग सडकों में नहीं हर  दिल  में मन्दिर चाहिये

निष्कपट  मन   मन्दिरों  में  राम  रमते पाइये

 

अब राजनिति ना  करे  उपयोग  सीता  राम का

उद्योग  में   तो   धर्म भी  हो गया बे -काम का

धर्म  में  उंगली  उठी,ब्रह्माण्ड भी  हिल जायेगा

श्रृष्टि में  प्रलय  भयंकर,खाक में  मिल जायेगा

 

फिर धर्म के धन्धे कहां निर्जन जमीं हो जायेगी

इन मजहबों के जंग से, श्रृष्टि धरम् को खायेगी

सब  महापुरुष आतंक   के पर्याय बनते  जायेंगें

लगता नहीं है धर्म  में  भगवान फिर  से आयेंगें

 

चौराहे में भगवान की  गाथा  को  गाना छोड दो

आड. में  भगवान  की  सत्ता  को पाना छेाड दो

हर  जगह  भगवान के  मन्दिर बनाना  छोड दो

मन्दिरों  और  मस्जिदों  का  ये  बहाना छोड दो

 

ये राम  का मन्दिर बने हर मुस्लिमों के हाथ से

मस्जिद  बने, बजरंग, और संघीयों  के साथ से

राम और अल्लाह की  कौमें  एक हों इस देश में

बस, एक  हिन्दुस्तान हो, कौमी, कबीले भेष में

 

कौम को  रोटी  मिले, हर  हाथ में बस, काम हो

हिन्दूआें  के  मुस्लिमों के  भी  जहन में राम हो

इन मजहबों और सम्प्रदायों के  गुरू,सब दूर हों

बस, आदमी  हो, आदमियत  से  भरा भरपूर हो

 

अब जो हदों से पार  होगा   राम  बनता जायेगा

द्वन्द  के  कोहराम  में तो राम  भी खो जायेगा

श्री राम  के  आदर्श  को  अपने  दिलों  में लाइये

कवि आग  कहता  है  हृदय  में राम रमते पाइये।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग

मो09897399815

Leave a Reply

Your email address will not be published.