#Kavita by Rajendra Bahuguna

आज सभी दलों के नेता दलितों की मलिन बस्तियों में जाकर वोटों की भीख मांग रहे हैं।

 

दलित फलित फल दायक

हे, बाबा  मैने  हरिजन  के   घर रोटी खायी

चरण  पखारे  दलितों  की  स्तुति भी गायी

मोदी जी ने  भी  दर-दर  जाकर  झाडू मारा

फिर हर मञ्चो  से आरक्षण  का बोला नारा

 

इन दलितो में भी महादलित हमने खोजा है

उस पासवान  को पाला जो तुम पर बोझा हेै

राष्ट्रपति भी दलित छांट कर हम ही लाये हैं

हम भीम  राव  के  पुत्र  सियासत में आये हैं

 

अब दलित  हमारी  झोली  में भी डालो बाबा

हम सवर्ण  मांगते भीख  हमें भी पालो बाबा

हम राम भक्त हेैं  कथा  हमारी  गालो बाबा

हे  दलितो  के  परं-पिता   हमें सभालो बाबा

 

इस  कांग्रेस  ने सत्तर  साल तुम्हे  निचोडा

इस प्रजातन्त्र में तुम्हे कंही का भी ना छोडा

जनमत  में  उपयोग  किया कौमो को तोडा

अब हम पर भी कृपा दृष्टि करदो कुछ थोडा

 

माया खुद को  दलित की बेटी क्यों कहती है

तुम सब देख रहे हो  महलों  में कैस रहती है

ये हरिया दलितों के दरिया में क्यों  बहती है

दलित  पीढियां  अब  भी  माया को सहती है

 

समाजवाद  ने  दलितो  का उपयोग किया है

इस बोट-बैंक से सत्ता में विनियोग किया है

यहां  अगडे-पिछडे,  कुर्मी-पासी  खूब  बनाये

ये सब दलित देश  के  इनके कर्मो से मुर्झाये

 

तुमने सब को  देखा हेै, अब  हमको भी देखो

कुछ दलित वोट की  भीख  हमारे उपर फैंको

ये नरेन्द्र मोदी  भी दलित घरों से ही आता हेै

दलितों  की  गीता  हर  चुनाव में भी गाता है

 

अब वि.एच.पी.,बजरंग  दलों  को डांट रहा हेै

शांशद  ओैर  विधायक दलित ही छांट रहा हेै

वो सपनो में भी मलिन बस्तियां झांक रहा हेै

यहां योगी  भी  रोटी  दलितों की फाँक रहा है

 

इस राजनीति  में सवर्ण  भिखारी  बनते देखे

यहां वजन  बढा दलितो काे,भारी  बनते देखे

अब इस वोट बैंक से वर्ण-व्यवस्था टूट रही है

क्या कवि आग ये  मनुषमृति सब झूठ रही है।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा;आग

मो09897399815

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