#Kavita by Rajendra Bahuguna

नेता की नक्कासी

अगर किसी को गाली  देनी हो तो बस,नेता जी बोलो

एक  शब्द  काफी  है ,चौराहों  पर पूरी पोल ना खोलो

खादी कुर्ता और  पाजामा ,मफलर,टोपी,सब कहती है

प्रजातन्त्र में जनता,नेता  जी  को शदियो से सहती है

फिर चुनाव आने  वाले हैं,जाओ  जोकर  के संग डोलो

अगर किसी को  गाली  देनी हो तो बस,नेता जी बोलो

 

सड़क छाप  पर मुहर लगाकर सभी नमूने तुमने चूने

बोट माॅगने  घर – घर  जाकर ये झुनझूने  तुमने चूने

जिसका कोई  ठौर ठिकाना काम,धाम पैगाम नही था

शहर,गाॅव के  गली,मुहल्लो में नक्कारा,नाम नही था

इन नंग ,मतंगो और मलंगो में  भूखा हो उसे  टटोलो

अगर  किसी  को गाली देनी हो तो बस,नेता जी बोलो

 

झूठ,कपट, छल, बलात्कार , व्यभिचार इनका पेशा है

जूते, चप्पल, गाली  खाकर  शान्त खडा ,कैसा भैंसा है

गाॅधी  जी  के आर्दशों  का  लालन-पालन  करने वालों

उपवाशों  के  जनवासो  में ,चौबीस  घण्टे  चरने वालों

लोकतन्त्र  की  खुली तुला पर भूखी,नंगी जनता तोलो

अगर  किसी  को  गाली देनी हो तो बस,नेता जी बोलो

 

भाषण की  भी भांशा  देखो,राम-राज्य  की आशा देखो

दाॅव  लगे  तो  पासा  फैंको, सारा  सदन, तमाशा देखो

यहां एक टाॅग  रेलों  में  देखो,एक टाॅग  जेलों  मे  देखो

जूॅआ, सट्टा और अय्यासी,  लूटमार  हर खेलो में  देखो

अरे, हे,कु-कर्मो के बे-शर्मो, मुस्टन्डो  के  झण्डों झोलों

अगर  किसी  को  गाली देनी हो तो बस,नेता जी बोलो

 

अब तो सड़क छाप आवारा जनमत से चुनकर आते है

ये  चाट  पकोडी बेचने वाले राष्ट्र-ध्वजो को फहराते है

रहने  को  घर-बार  नही  था,फारम -हाउस की  बाते है

राजनीति  में  हिन्दुस्तानी  नेता  की  कितनी  जाते हैं

प्रजातन्त्र के विषमन्थन से,सागर में तो विष ना घोलो

अगर  किसी को  गाली  देनी हो तो बस,नेता जी बोलो

 

रोटी  है  तो  दाल  नही  हेै,नेता को कुछ ख्याल नही हेै

मंहगायी  मलाल  नही है, बिखरे  स्वर  हैं ताल नही है

पल-पल  में  परिधान  बदलने  से तो भारत शर्माता है

कुछ तो शर्म  कराे  बे-शर्मो, अब  नंगी  भारत माता है

माँ की  सेवा  में अर्पित  हो करके अपने पाप तो धोलो

अगर  किसी  को  गाली देनी हो तो बस,नेता जी बोलो

 

डेढ़़ अरब  की जनता  भूखी इनके  कारण  ही मरती है

नेता का इतिहास उठाओ,राजनीति क्या-क्या करती है

सोने की चिडिया का भारत मिट्टी में क्यो मिलजाता है

संविधान का प्राविधान क्यों , नेताओ से हिल जाता है

कवि‘आग’ के श्रोताओं को  क्यों  डसते हो सर्प सपोलों

अगर  किसी  को गाली  देनी  हो तो बस,नेता जी बोलो !!

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

9897399815

 

 

 

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