#Kavita by Rajendra Bahuguna

मैने  धैर्य  नही छोडा है

वाह री  जनता  चार साल  के  शासन  में ही टूट गये

अभी  तो  धन्धा  शुरू  हुआ हेै इतने  जल्दी रूठ गये

नोट बन्दी और जी.एस.टी.से  अभी  पसीने छूट गये

ये अच्छे दिन के गुब्बारे सब फुलने से पहले फूट गये

 

हा-हाकार  मची भारत  में पर मैंने  धैर्य  नही छोडा है

ये मेरा सीना छप्पन इञ्ची  भक्तो  के कारण चौडा है

राजनीति में बिकने  वालो को  भी अपने संग जोडा हेै

ये तुरंग  तो  हर प्रान्त  में सत्ता  के संग-संग दौडा है

 

इन 70 सालो से भारत  में  बी.जे.पी.का नाम नही था

अटल बिहारी आये तो थे  उनका  कुछ पैगाम नही था

आडवानी के  साथ कभी भी  सत्ता  धारी राम नही था

मुझसे ज्यादा जनसंघ में कभी किसी का दाम नही था

 

फिर ढाई घण्टे भाषण देना  सबके बस की बात नही है

छल,बल,कपटी,जुमले कहना  नेता की औकात नही है

मैं राजनीति  का   डी.एन.ए.हूँ  ,मेरी कोई जात नही है

इस मंहगायी और बलात्कार  में मेरा कोई हाथ नही है

 

यहां मेरे  रथ को घटोत्कक्ष अमित शाह ही ठेल रहा हेै

महाभारत की  राजनीति  में चौपड.,पासे   खेल रहा है

मै जुमलो के तीर धनुष से हवा में खुलकर छो़ड़ रहा हूँ

प्रतिद्धन्दी के चक्रव्यूह के सब षडयन्त्रो को तोड़ रहा हूँ

 

राजनति  में  बे-रोजगारी, तेल,गैस सब कुछ चलता है

फिर चन्दा देने  वाला  भी  तो मंहगायी से ही पलता है

राजनीति का खेल  खिलाकर धनवानो  को पाल रहा हूँ

मैं 2019 उन्नीस में  फिर से पी.एम पद खंगाल रहा हूँ

 

काठ की हण्डी  एक  बार  फिर जनमत भट्टी ढूँढ रही है

जहां घाव लगे  हैंं, उपचारों  की  मरहम पट्टी ढूँढ रही है

कर्नाटक में  भानुमति का  कुड़मा फिर से एक हो गया

ये मेरा भारत ऱाजनीती के इस उत्सव का केक हो गया

 

हम नेता  है  हमको तो  इस जनता की औकात पता है

जनता के इस बोटबेैक की गुप्त रहस्य हर बात पता है

हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाइ आरक्षण की जात पता है

कवि आग अब क्या लिखेगा उसके भी जज्बात पता है।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)

मो0 9897399815

 

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