#Kavita by Rajendra Bahuguna

मुर्दा-गुर्दा दिखा रहा हेै

स्वर्ण भस्म को खाने वाले हमको फिटनेस सीखा रहे हैं

क्यों चौबीस घण्टे आवारा साण्डो को चैनल दिखा रहे हैं

कुछ थोडी सी मेहनत करते उन  मजदूरों के तसले ढोते

या किसान  के खेत में जाकर थोडा  ही फसलों को बोते

 

ए.सी के अय्यास निकम्मे हमको फिटनेस दिखलायेंगे

फिर यौवन वर्धक औषधियो को जलपान  में ये खायेंगे

यहां दो-दो घण्टे  मेकप  करके  हर चैनल पर ये आयेंगे

झूठ कपट,छल करने वाले  कब  तक राष्ट्र-गीत गायेंगे

 

राजनीति  का  सर्कस देखो हर चैनल पर खास हो गया

ये  चौथा स्तम्भ  सियासी  राजनीति का  दास हो गया

आजादी  के   बाद देश का  इन नेताओं से नास हो गया

भारत के  इस  प्रजातन्त्र का दुनिया में उपहास हो गया

 

जहां फ्री  में  खाना,फ्री में पीना फ्री में जीना हो जाता है

टेस्ट करा कर  देखो  इनका  ये नेता क्या-क्या खाता है

यहां आधा  भारत  मजबूरी में  दो-जून की रोटी पाता है

मेरे देश  का  नेता  हमको अपनी फिटनेस दिखलाता है

 

फिटनेस ही करनी है तुमको जनसख्या पर रोक लगाते

इस  फिटनेस  से  पूरे देश  में एक ही शिक्षा लेकर आते

मंहगायी,भुखमरी,गरीबी पर  भी तो फिटनेस दिखलाते

ये बे-रोजगारी फैल रही है उस पर  भी  फिट होकर आते

 

नेता  के  दैनिक  खर्चे  से  यहां सौ-सौ भूखे खा सकते हेै

राष्ट भक्ति के गीत सियासी  इनसे अच्छा गा सकते हैे

हर जिला,गाँव,देहात की सेवा इनसे बेहतर कर सकते हेै

इनको मौका  देकर  देखो ये  सरहद पर भी मर सकते है

 

क्या जरूरत हेै इस फिटनेस के नाटक  को दिखलाने की

क्या जरूरत हेै  मेकप  करके  हर चैनल पर छा जाने की

क्या जरूरत हेै इस जीर्ण-शीर्ण तन से हडडी सहलाने की

क्या जरूरत हेै इस  फिटनेस  से  जनमत को गर्माने की

 

क्या नेता जी इन मजदूरो का  कर्कस खाना खा सकते हेैं

क्या नेता जी  मध्य-वर्ग  के  जीवन  को अपना सकते हेै

इन मुफ्तखोर छप्पन भोगों से नेता की फिटनेस आती है

कवि आग की कविता  साण्डो  की फिटनेस को दर्शार्ती है।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा (आग)

मो0 9897399815

 

Leave a Reply

Your email address will not be published.