#Kavita by Rajendra Bahuguna

सरकार की ना-समझी

यदि किसी में हिम्मत है तो मठ, आश्रम में टैक्स लगओ

मन्दिर,मस्जिद,गुरूद्धारों को कर निदान परिधी में लाओ

अगर किसी में हिम्मत हो धमार्थ ट्रस्ट पर जांच बिठाओ

ये जितने भी कर-मुक्त देश मेंं,ढूंढो उन पर केस चलाओ

 

यंहा बिन  धन्धे के अरबों-खरबों की माया की चौकीदारी

मध्य-वर्ग और निम्न-वर्ग भी इनके कारण बना भिखारी

क्यों धर्म-ध्वजा ही आय-करो की,सारी सीमा चाट रही है

फिर कालेधन को धवल बना कर,गैर-काम में बांट रही है

 

इन बाबाओं का, बे-शुमार  धन ,अय्यासी  को पाल रहा है

क्यों आज गेरूआ  कालेधन  से  राजनीति  संभाल रहा है

अब योग-गुरू भी कर निदान  की  नई  तरकीबे ढूंढ रहे है

ये आटा, मिर्च,  मशाला, चावल  आधा  भारत  मूंंड रहे है

 

क्यों  बडे़ बडे़ भवनो  में इन  यवनो  का  डेरा बन जाता है

क्यों ये बाबा ही यहां धमार्थ-ट्रस्ट  का पूरा लाभ उटाता है

इतिहास  गवाह  है ,ऋषि, मुनि  से, राजा  भी कर लेते थे

तब ऋषि राज – काज की सारी शिक्षा , आशीशो से देते थे

 

आर्य-खण्ड  में  उनके कारण, राष्ट्र  नियम  से चलता था

हर  दीन-दुखी  और  भूखा-नंगा  पलता और संभलता था

जप औेर  तप  की ऐसी  महिमा, राष्ट्र  सुरक्षित रहता था

उस मनवता में, सत्य अहिंसा और दान रगो में बहता था

 

हर मसले  पर  भौंक  रहे  हो,वित्त-व्यवस्था छौंक रहे हो

क्यों राज-काज  के  सारे  धन्धे, भीड़ जुटाकर रोक रहे हो

ओने-पौने दामो में क्यों  जमीन  किसान की लुट जाती है

क्या ये हेरा-फेरी  महपुषों  के योग  शास्त्र  को दोहराती है

 

अब ये  राम रहीम, ये  आशा बापू, राधे  मां  की अय्यासी

इस राम कुमार और राम वृक्ष की कामुकता मथुरा-काशी

क्यों सब  राजनीति  के  संरक्षण  से  बने हुये हैं ब्रजवाशी

यहां ये सब  बाबा मुरली  बजा रहे हैं ,नाच रहे हैं अरदासी

 

अब चाण्क्यों  की  परिभांषा  में  अर्थशास्त्र को आम करो

इन उल्टी – सीधी बातों से ना,इस भारत को बदनाम करो

इन काले-धन  के  रखवालों  को, अपने घर में ही खंगालो

कवि आग कहता  है  बाबा  गलत फहमियों को मत पालो!!

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

मो09897399815

Leave a Reply

Your email address will not be published.