#Kavita by Rajendra Bahuguna

सत्ता के राष्ट्र-भक्त

हे,राजनाथ जी महबूबा  मुफ्ती का ना गुणगान करो

अलगाववाद के नेताओं को  ढूंढो  और  पहचान करो

काशमीर हमारा मस्तक  हैे इसका  तो सम्मान करो

अब या तो इनसे युद्ध करो या काशमीर को दान करो

 

ये आतंकी  सीमा में घुसकर क्यों नरसंहार मचाते है

क्यों विधानसभा  में  पाकिस्तानी  नारे गाये जाते है

क्यों दुश्मन देश  के झण्डे  भारत  में फहराए जाते है

हम राष्ट्र-भक्त हेै भारत की  जय-जयकार लगाते है

 

ये छप्पन इंची छाती  वाले दुश्मन  का  घर भूल गये

क्या राष्ट्र-भक्त भी सत्ता के  झूले  में ऐसे झूल गये

इन जुमलों के गुब्बारो से  सब भक्त  बावरे फूल गये

इस काशमीर के खर्चे से तो ब्याज गये और मूल गये

 

अब तो  केवल लशों  की  गिनती  होती है साासन में

पाकिस्तानी  नाम  नही  है कंही किसी  भी भाषण में

यहां कौन  पूछने वाला  है तुम क्यों बैठे  सिंहासन में

विश्व-गुरू ये भारत है अब यहां रामदेव  के आशन में

 

ये सुषमा माता  कहती थी ,दश शीश काटकर लायेंगे

ये  राष्ट्र -ध्वजा लाहोैर में जाकर मोदी जी फहरायेगे

फिर राजनाथ जी कहते है हम  तोपों  से गोले दागेंगे

ये सत्ता के  कुम्भकरण  अब  इस नींद कैसे  जागेगे

 

याद करो उन  वादों को जो  चौराहे  में तुमने गाये थे

याद करो उन उन्मादो को जिनसे तुम सत्ता पाये थे

याद करो उस जनता को जिनकोे बस  तुम्ही भाये थे

जनता ही तुमसे  पूछ  रही है क्या करने तुम आये थे

 

आज  राष्ट्र का स्वाभिमान भी व्याकुलता से रोता हेै

सरहद पर वीर जवानो का शव राष्ट्र  तिरंगा ढोता है

भारत का मस्तक काशमीर भी  राजनीति से रोता है

ये  कैसा  चौकीदार वतन का जो  परदेशों में सोता है

 

भारत  में सत्ता पाने  से,सरहद  सम्मान नही होगा

गला फाड़ चिल्लाने  से,जग  में  गुणगान नही होगा

ये आतंकी मरूस्थल  है,जो  अब  मरूधान नही होगा

लगता है मजहब में अब तो आगे रमजान नही होगा

 

मैं जो भी कविता गाता हूँ,भक्तों  को रास नही आती

भारत की जनता संकट मे मर जाये घास नही खाती

बे-रोजगारी, मंहगायी  का हल  कुछ खास नही होगा

कवि आग  कहता  है जागो  फिर  उपहास नही होगा।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

मो09897399815

 

 

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