#Kavita by Rajendra Bahuguna

भारत माता की जय

भारत माता की जय  बोलो भारत का अनुमान नही है

नेता हमको  लूट  रहे  हैं  इसका  हमको  ज्ञान नही है

अहिसुष्णता  फैला   करके   सहिसुष्णता  ढूंढ   रहे हैं

सात दशक से  नेता  हमको  अपने  ढंग  से मूंड रहे हैं

हम  प्रजातन्त्र  की भेडें हैं,बस भेडों को ये भान नही है

भारत माता की जय बोलो भारत  का अनुमान नही है

 

शिक्षा,दीक्षा, गुरूकुल  और  मदरसों  में  झण्डे-डण्डे हेैं

चक्रव्यूह  की  जड  में   बैठे  राजनीति  के  मुस्टण्डे हेैं

हिन्दू,मुस्लिम, सिक्ख, इसाई  बोट-बैंक के ये फण्डे हैं

बच्चो ने भी पुस्तक  छोडी ,हाथ में सबके अब झण्डे हैं

यौवनता  की  भीडे   देखो, भीडों  में  कुछ जान नही है

भारत माता की जय  बोलो  भारत का अनुमान नही है

 

आज देश में विश्वविद्यालय अपनी संसद खोल रहे हैं

अब राजनीति के नारे गुरूकुल और मदरसे  बोल रहे हैं

शिक्षक भी तो  सत्ता  मद  में  कीडे   ही तो पनपाते हैें

तोड-जोड की राजनीति  से ये  भी  तो  चुनकर आते हैं

आज देश में गुरूओं की  भी तो  अपनी पहचान नही है

भारत माता की जय  बोलो  भारत का अनुमान नही है

 

सतयुग,त्रेता,द्धापर  युग से  जो शिक्षा  की शान रहा हो

ब्रह्माण्ड भी आर्यखण्ड की जप,तप, दीक्षा मान रहा हो

जिस  धरती में  ब्रह्मा ,विष्णु ,शंकर बाबा  डोल रहे हों

राम,कृष्ण,महावीर,बुद्ध  भी, भारत की जय बोल रहे हों

इस धरती का आज हमारे दिल  में भी गुणगान नही है

भारत माता की जय  बोलो  भारत  का अनुमान नही है

 

शेखर,सूभाष और भगत सिंह  अभी हाल में ही आये थे

इस भारत ने राजगुरू,बिसमिल, हमीद  भी तो जाये थे

गाँधी,नहरू और पटेल ने क्या  कुछ  कम सपने संजोये

लाखों राष्ट्रभक्त भारत ने, स्वाभिमान पर अपने खोये

शब्दो के बस,सर-तरकस हैं चारू, चाप, सन्धान नही है

भारत माता की जय  बोलो  भारत का  अनुमान नही है

 

ऋण माफी की  चर्चा होगी, जी.एस.टी गुणगान चलेगा

अब कालाधन आने वाला है, इस जुमले से राष्ट्र पलेगा

यहां बड़े-बड़े  व्यवसायी  भारत  का  धन  लेकर भागेगें

वतन के  चौकीदार सियासी  परदेश  में  जाकर जागेंगे

अच्छे दिन कैसे आयेंगे,अब इन जुमलों में जान नही है

भारत माता की जय  बोलो  भारत  का अनुमान नही है

 

उसी राष्ट्र में राजनीति के दल,दल-दल ही तो फैलाते हैं

भोजन को  मोहताज  वतन  है, नेता बिरियानी खाते हैं

क्यों मंहगायी ,भुखमरी, गरीबी,सुरसा जैसी फैल रही है

राजनीति मुर्दो के  शव से कफन  खोल  कर खेल रही हेै

कवि आग अब राष्ट्र-भक्ति के गीतों में सुर-तान नही है

भारत माता की जय  बोलो  भारत का   अनुमान नही है।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

मो0 9897399815

 

 

 

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