#Kavita by Rajendra Bahuguna

कितनी लाश गिनोगे अब

मोदी जी गिनती बतलादो  कितने  फौजी  मरवाओगे

तुम पूरी दुनिया घूम चुके अब कितनो के घर जाओगे

आतंक वाद का रोना  तुमने  सब  दशों के आगे गाया

चार साल की राजनीति में कौन तुम्हारे साथ में आया

 

तुम आतंकी रक्षा करने का क्यों फतवा जारी करते हो

फिर मञ्चो की लाचारी  से  भाषण तुम भारी करते हो

परदेशों में भी  जाकर  के इन  टुच्चो से यारी करते हो

राजनीति के पद  के  मद  में क्यों मारा मारी करते हो

 

काशमीर के गठबन्धन का क्रन्दन हम सब झेल रहे हैं

रमजानो  में  राजनाथ सिह  मुफ्ती के संग खेल रहे हैं

फौेजों पर ये पाकिस्तानी ,विस्फोट धड़ा-धड़ पेल रहे हैं

अब तेरे रथ को हम सब अन्धे नैन  सुखो से ठेल रहे हैं

 

हमनेे प्रतिपक्ष में  देखा,तुम क्या क्या हुँकार लगाते थे

भारत माँ की गली मुहल्लो में जय-जय कार लगाते थे

सदन  के  अन्दर  मनमोहन  को तुम लाचार बताते थे

फिर प्रतिपक्ष  को  राष्ट्र-द्रोह  का  भारत भार बताते थे

 

अब तो जनता ने  सब  ताकत  तेरे  हाथ  में दे डाली हेै

वतन का चौकीदार बना,कंही  मरूधानो का तू माली हेै

तुम तो खुद ही बोल रहे थे ,छाती छप्पन इञ्च वाली है

क्या तरकस में तीर  नही हेै,चारू-चाप ही सब खाली है

 

लाशों  की  गिनती कर-कर के भारत माता हार गयी हेै

तेरी चुप्पी प्रजातन्त्र  के  इस  जनमत को मार गयी है

दुनिया के  देशों में जाकर,कुछ तो सिख कर आये होते

उस अमरीका,जापान,चीन  से कुछ तो शिक्षा पाये होते

 

क्यों भरी जवानी के बच्चे यहां सरहद में गँवाये जाते हैं

क्यों एल.ओ.सी. के  वाशिन्दे  सरहद में समाये जाते हेैं

ये अलगाव वाद  क्यों  घाटी में इतना उत्पात मचाता है

महबूबा मुफ्ती  से  कैसा  प्रेम  का खूनी रिस्ता नाता हेै

 

भंग करो  काशमीर  सियासत,फौज को मौज मनाने दो

दश-बीस मरे आतंकी,उनको खूनी होली रोज मनाने दो

तुम आना-जाना बन्द करो, दुष्टो को सबक सिखाने दो

कवि  आग  को  रोैद्र-ओज  के छन्द विभत्स से गाने दो।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

मो0 9897399815

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