#Kavita by Rajendra Bahuguna

कबीरा नेता दूर कर,सब हिन्दू,मुस्लिम एक

नेता के कारण बंटे,यहां  जनमत संग अनेक

सत्ता का सर्कस

वी.पी.सिंह भी कालाधन  हथियार  बनाकर लाया था

यहां चार साल पहले मोदी  ने वही अस्त्र अपनाया था

उस पी.एम. के आरोपों  में  कुछ भी नजर नही आया

ना ही मोदी स्वीस बैंक  से  काला धन अब तक लाया

 

वी.पी.सिंह  ने  आरक्षण  से  देश  में आग लगायी थी

मोदी जी को मुस्लिम तुष्टिकरण  की नीति भायी थी

तब वी.पी.सिंह भी सत्ता मद  में  चौराहों में भागा था

यहां इसी भूल में मोदी  चौकीदार  वतन का जागा था

 

वहां वी.पी.सिंह की टोपी थी,यहां छप्पन इंची छाती है

बी.जे.पी.भी साथ  में थी,जो आपात काल को गाती है

वहां अटल बिहारी  नेता थे,य़हां दामोदर की ख्याती है

इस  राजनीति  में चोर-चोर  सब  मौसेरे भाई साथी हैं

 

सत्ता और सियासी  जुमलों  से  सब  नेता खेल रहे हैं

तब साठ करोड़ अब डेढ़अरब जुमलों को ही झेल रहे हैं

शराब वही  है राजनीति में बस, बोतल बदली जाती है

फिर सत्ता का नशा सियासत जनता को दिखलाती है

 

यहां सत्ता मद के चूर नशे में नेता  को आभाष नही है

चिन्तन-मन्थन की  बुद्धि भी अब नेता के पास नही है

डेढ अरब की इन भीड़ों में किसी की रूचि खास नही है

कफन उठाकर देखो जनता भी तो जिन्दा लाश नही है

 

यहां  हिन्दू, मुस्लिम ,सिक्ख,इसाई मुर्दे ही मडराते है

बस,अगड़े-पिछड़े गीत  यहां पर मरघट को सहलाते है

यहाॅ फिर राजनीति के काँटे में नेता आटा चिपकाते है

जनमत  के  र्निलज्ज  मच्छ इस काँटे मे फंस जाते है

 

ये मंहगायी और बेराजगारी हम शदियो से भोग रहे हैं

प्रजातन्त्र  के  मालिक ही क्यो प्रजातन्त्र मे रोग रहे हैं

यदि नेता है  तो  छल,बल,कपटी नुक्ते ही अपनायेगा

कवि आग भी इन  टुच्चो पर कब तक कविता गायेगा।।

राजेन्द्र प्रसाद बहुगुणा(आग)

9897399815

 

 

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